Wednesday, 3 June 2020

DeepK nowlegde Of God Kabir ( कबीर परमात्मा का ज्ञान )

Deep Knowlegde Of God Kabir
( कबीर परमात्मा का ज्ञान )

Lord Kabir conveyed the authentic and true knowledge, that Brahma, Vishnu and Shiva are also stuck in the vicious cycle of life and death. Durga is their mother and Kaal (Brahm) is their father.

Kabir, maa ashtangi pita niranjan, ye jamm darunn vanshann anjann. 
       Teen putra ashtangi jae, brahma, vishnu, shiv naam dharaae.

सच का पता चल रहा है
 भगवान कबीर ने प्रामाणिक और सच्चे ज्ञान से अवगत कराया, कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी जीवन और मृत्यु के दुष्चक्र में फंस गए हैं।  दुर्गा उनकी माता हैं और काल (ब्रह्मा) उनके पिता हैं। 
कबीर, माँ अष्टांगी पीता निरंजन, तु जाम दरुण वंसन्जन अंजन।
Teen पुत्री अष्टांगी जय, ब्रह्मा, विष्णु, शिव नाम धराए।।

Unique and True 
Spiritual Knowledge
Lord Kabir was the One, who made us understand by giving numerous proofs, that Kaal (Jyoti Niranjan) was the giver of Holy Gita's knowledge and not Shri Krishna.

अद्वितीय और सच्चा
आध्यात्मिक ज्ञान
भगवान कबीर ही थे, जिन्होंने हमें कई प्रमाण देकर समझा, कि काल (ज्योति निरंजन) पवित्र गीता के ज्ञान के दाता थे और श्री कृष्ण नहीं।

Spiritual knowledge given by True Lord Rabir

LORD KABIR TOLD DHARAMDAS JI THAT, “I KEEP ROAMING IN THE 21 MORTAL UNIVERSES OF KAAL TO FREE MY BELOVED SOULS FROM THE DEADLY TRAP OF KAAL. I IMPART TRUE SPIRITUAL KNOWLEDGE TO MY SOULS AND BY MAKING THEM DO SCRIPTURE BASED WORSHIP, I GRANT THEM SALVATION ”.

Scripture based 

KNOWLEDGE
"First and foremost, the fact that, God is in form" was told by Lord Kabir Himself, mentioning that, God has a human - like body. Currently, the same knowledge is being imparted by Saint Rampal Ji, providing evidences From all Holy books and scriptures, that God / Allah is in form, is worthy of being viewed just like a King and is seated on His throne.

शास्त्र आधारित ज्ञान
 "सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि, भगवान के रूप में है" भगवान कबीर ने खुद बताया था, इस बात का उल्लेख करते हुए कि, भगवान का मानव शरीर जैसा है।  वर्तमान में, एक ही ज्ञान संत रामपाल जी द्वारा प्रदान किया जा रहा है, जो सभी पवित्र पुस्तकों और धर्मग्रंथों से साक्ष्य प्रदान करते हैं, कि भगवान / अल्लाह के रूप में है, एक राजा की तरह देखे जाने के योग्य है और उनके सिंहासन पर बैठा है।

Supremo Knowledge gwen by Lord Kabir di.

The first one to tell, that God can free souls by destroying all sins, is Lord Kabir Ji Himself. Presently, Saint Rampal Ji Maharaj has proved from the Holy Vedas itself, that God can strike off the curse of bad deeds and vanish all sins completely. no matter how heinous they might be. The evidence is mentioned in Yajurved - Adhyay 8, Mantra 13.

भगवान कबीर दी द्वारा सर्वोच्च ज्ञान ज्ञान।

 यह बताने वाला पहला, कि भगवान सभी पापों को नष्ट करके आत्माओं को मुक्त कर सकते हैं, स्वयं भगवान कबीर जी हैं।  वर्तमान में, संत रामपाल जी महाराज ने पवित्र वेदों से ही सिद्ध किया है, कि भगवान बुरे कामों के अभिशाप को दूर कर सकते हैं और सभी पापों को पूरी तरह से मिटा सकते हैं।  कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने जघन्य हो सकते हैं।  यजुर्वेद - अध्याय 8, मंत्र 13 में प्रमाणों का उल्लेख है।



Remarkable

knowledge provided by The Almighty


LORD KABIR HAS TOLD THE STATUS OF AKSHAR PURUSH, KSHAR PURUSH AND THREE DEMIGODS THROUGH HIS DIVINE SPEECH AS :

Kabir , Akshar Purush ek ped hai, niranjan vaaki daar. Teeno deva shaakha hain, paat roop sansaar. Meaning: The trunk of the world-like peepal tree, is Akshar Purush. Many thick branches arise from the trunk. One of those thick branches, is Kshar Purush. Three more branches arise from the main branch. These are the three gods (Rajguna Brahma, Satguna Vishnu and Tamguna Shiva); the leaves coming out of these branches are the people, who reside in this mortal land. The roots of the tree being Lord Kabir Himself, who is indestructible!

असाधारण
 सर्वशक्तिमान द्वारा प्रदान किया गया ज्ञान

 भगवान कबीर ने आचार्य पुरष, केसर पुरष और तीनों देवगणों को त्रिशंकु के रूप में इस प्रकार की उपाधि दी:

 कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड है, निरंजन वाकी डार।  तेनो देव शाखा है, पात रूप संसार।  भावार्थ: संसार रूपी पीपल के वृक्ष का धड़, अक्षर पुरुष है।  ट्रंक से कई मोटी शाखाएं निकलती हैं।  उन मोटी शाखाओं में से एक, केशर पुरूष है।  मुख्य शाखा से तीन और शाखाएँ निकलती हैं।  ये तीन देवता हैं (राजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु और तमगुण शिव);  इन शाखाओं से निकलने वाले पत्ते लोग हैं, जो इस नश्वर भूमि में निवास करते हैं।  वृक्ष की जड़ें स्वयं भगवान कबीर हैं, जो अविनाशी हैं!

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Tuesday, 2 June 2020

Divine Play Of God Kabir (कबीर परमात्मा की लीलाएं )

Divine Play Of God Kabir 
( कबीर परमात्मा की लीलाएं )

आज कबीर साहेब द्वारा की गई अनेकों लीलाओं से प्रमाणित किया कि सत् पुरुष अकालमूर्त शब्द स्वरूपी राम कबीर परमेश्वर जी है।

🌺 सतगुरु रामपाल जी महाराज जी प्रमाणित करके बताते हैं :-

🔅कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना
पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की।


🔅सम्मन को पार करना
सम्मन बहुत गरीब था। जब कबीर परमात्मा का भक्त बना। तब परमात्मा के आशीर्वाद से दिल्ली का महान धनी व्यक्ति हो गया, परंतु मोक्ष की इच्छा नहीं बनी।
सम्मान ने अपने परमेश्वर रूप सतगुरु के लिए अपने बेटे की कुर्बानी की थी। जिस कारण अगले जन्म में नौशेरखान शहर के राजा के घर जन्मा। फिर ईराक देश में बलख नामक शहर का राजा अब्राहिम सुल्तान बना। परमात्मा ने उस आत्मा के लिए अनेकों लीलाएं की और उसका उद्धार किया।


🔅दादू जी का उद्धार
सात वर्ष की आयु के दादू जी को परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रूप में मिले व ज्ञान समझाया और सतलोक दिखाया।
इसलिए परमात्मा कबीर जी की महिमा गाते हुए दादू  जी कहते हैं :-

जिन मोकूं निज नाम दिया, सोई सतगुरु हमार ।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सिरजनहार ।।



🔅मीरा बाई को शरण में लेना
मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि श्री कृष्ण जी नाशवान हैं। समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है। संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया।

गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। 
देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।।



संत गरीबदास जी को शरण में लेना

🔅परमात्मा कबीर जी ने दस वर्षीय बालक गरीबदास जी को सतलोक के दर्शन करवाए, ज्ञान समझाया और अपनी शरण में लिया और सतलोक का वासी किया।
शेखतकी के अत्याचारों को माध्यम बना लाखों जीवों का उद्धार करना


🔅स्वामी रामानंद जी से ज्ञान चर्चा 
स्वामी रामानंद जी से ज्ञान चर्चाके लिए आए गोरखनाथ जी से परमेश्वर कबीर जी ने खुद चर्चा की और गोरखनाथ जी को पराजित कर सत्य ज्ञान से परिचित करवा मोक्ष की राह दिखाई।


तेरह गाड़ी कागजों को लिखना
    एक बार दिल्ली के बादशाह ने कहा कि कबीर जी ढ़ाई दिन में तेरह गाड़ी कागजों को लिख दे तो मैं उनको परमात्मा मान जाऊंगा । परमात्मा ने गाड़ियों में रखे कागजों पर अपनी डण्डी घुमा दी। उसी समय सर्व कागजों में अमृतवाणी सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान लिख दिया। राजा को विश्वास हुआ।


धर्मदास को सदमार्ग दिखाना
भक्त धर्मदास जी बांधवगढ़ के धनी सेठ थे। देवी तथा शिव-पार्वती की पूजा, तीर्थों व धामों पर जाकर स्नान करना आदि शास्त्रविरूद्ध साधना किया करता था।
धर्मदास जी जब तीर्थ यात्राओं पर निकले तो परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के वेश में उन्हें मिले और बार-बार ज्ञान की चोट की, सतलोक के दर्शन कराए और अपनी शरण में लिया।


ऋषि दत्तात्रे जी ने परमात्मा कबीर जी (ऋषि मुनीन्द्र रूप से) तत्वज्ञान समझा, दीक्षा ली।
सतनाम तक मिला। सारनाम उस समय किसी को नहीं देना था क्योंकि सारनाम पर उस समय ऋषियों को विश्वास नहीं होना था। कलयुग के पाँच हजार पाँच सौ पाँच वर्ष बीतने तक सार नाम, सार ज्ञान (तत्वज्ञान) गुप्त रखना था। ये दोनों कारण मुख्य रहे। जिस कारण से सारनाम नहीं दिया गया।

गरीब, दुर्बासा और मुनिंद्रका, हुवा ज्ञान संवाद।
दत्त तत्त्व में मिल गये, जा घर विद्या न बाद।।
सुपच सुदर्शन को पार करना


परमात्मा कबीर जी द्वापर युग में करूणामय नाम से प्रकट थे
रमात्मा कबीर जी द्वापर युग में करूणामय नाम से प्रकट थे  तब सुपच सुदर्शन बाल्मीकि को उपदेश देकर पार किया। गोरख नाथ को भी समझाया।
गरीब, कल्प करी करुणामई, सुपच दिया उपदेश।
सतगुरु गोरख नाथ गति, काल कर्म भये नेस।।
कबीर परमात्मा की अद्भुत लीलाएं


बली राजा की यज्ञ में बावना बने
बली राजा की यज्ञ में बावना बने। फिर विशाल रूप किया। गज तथा मगरमच्छ युद्ध कर रहे थे तो उनकी भी गति भक्ति अनुसार की। द्रोपदी का चीर भी परमात्मा कबीर जी ने बढ़ाया। द्रोपदी श्री कृष्ण की भक्त थी। इसलिए बड़ाई कृष्ण को मिली।


एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई।

गरीब, पीतांबर कूं पारि करि, द्रौपदी दिन्हीं लीर।
अंधे कू कोपीन कसि, धनी कबीर बधाये चीर।।

नीरू को धन प्राप्ति ⤇


🔅कबीर परमेश्वर जब नीरू नीमा को बालक रूप में मिले तब उससे पूर्व दोनों जने (पति-पत्नी) मिलकर कपड़ा बुनते थे। 25 दिन बच्चे की चिन्ता में कपड़ा बुनने का कोई कार्य न कर सके। जिस कारण से कुछ कर्ज नीरू को हो गया। फिर कबीर जी ने कहा कि आप चिंतित न हों, आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गऊ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात् दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा।


कसाई का उद्धार
गरीब, राम नाम सदने पिया, बकरे के उपदेस।
अजामेल से ऊधरे, भगति बंदगी पेस।।
एक सदन नाम का कसाई था। संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ। ऐसे ही सदन कसाई को शरण में लेकर सतभक्ति कराकर उद्धार किया था।


🔅एक बार परमात्मा कबीर साहेब जी जब 5 वर्ष की आयु के थे उस समय उन्होंने 104 वर्ष की आयु के रामानंद जी के साथ ज्ञान चर्चा की, उनके साथ कई लीलाएं की, अपना परिचय करवाया तथा सतलोक दिखाया तब रामानंद जी को दृढ़ विश्वास हुआ कि कबीर साहिब ही सृष्टि रचनहार पूर्ण ब्रह्म हैं।


🔅पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने विट्ठल रूप धारण कर नामदेव की रोटी खाई तथा उसकी झोपड़ी बनाई
बिठल होकर रोटी खाई, नामदेव की कला बढ़ाई।
पुंण्डरपुर नामा प्रवान, देवल फेर छिवा दई छान।।
कोढ़ की असहनीय पीड़ा से दुखी सैकड़ों व्यक्तियों को परमात्मा ने रोगमुक्त किया और अपनी शरण में लिया ।

 कबीर परमेश्वर की अन्य लीलाएँ

                " Jeene ki Rah "

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Monday, 1 June 2020

Miracles Of GodKabir ( भगवान कबीर के चमत्कार )

Miracles Of God Kabir

( भगवान कबीर के चमत्कार )




पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने अपने जीवनकाल में अनेको लीलाएँ करी जिससे यह प्रमाणित होता है कि वास्तव में कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा है और वह ही ऐसे लीलाएँ किया करता हैं।

💥"सिकंदर लोधी बादशाह के जलन का असाध्य रोग ठीक करना"
कबीर परमेश्वर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के जलन का असाध्य रोग आशीर्वाद मात्र से ठीक कर दिया। वह रोग जो किसी काजी, मुल्ला के जंत्र-मंत्र से भी ठीक नहीं हुआ था।
💥"स्वामी रामानंद जी को जीवित करना"
दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने स्वामी रामानंद जी की गर्दन तलवार से काट दी थी। कबीर साहेब जी ने देखा कि रामानंद जी का धड़ कहीं और सिर कहीं पर पड़ा था। तब कबीर साहेब ने मृत शरीर को प्रणाम किया और कहा कि गुरुदेव उठो। दूसरी बार कहते ही सिर अपने आप उठकर धड़ पर लग गया और रामानंद जी जीवित हो गए।
💥"मृत लड़के कमाल को जीवित करना"
शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया।

💥"भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना"
एक समय तोताद्रि नामक स्थान पर सत्संग था। सत्संग के पश्चात भण्डारा शुरू हुआ। भंडारे में भोजन करने वाले व्यक्ति को वेद के चार मन्त्र बोलने पर प्रवेश मिल रहा था। कबीर साहेब की बारी आई तब थोड़ी सी दूरी पर घास चरते हुए भैंसे को हुर्रर हुर्रर करते हुए बुलाया। तब कबीर जी ने भैंसे की कमर पर थपकी लगाई और कहा कि भैंसे इन पंडितों को वेद के चार मन्त्र सुना दे। भैंसे ने छः मन्त्र सुना दिए।

💥"जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा"
जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार रहा था। गर्म खिचड़ी उसके पैर पर गिर गई। उस समय कबीर जी अपने करमण्डल से हिम जल रामसहाय पाण्डा के पैर पर डाला। उसके तुरंत बाद राहत मिलते ही पैर ठीक हो गया। उस समय कबीर जी ना होते रामसहाय पाण्डा का पैर जल जाता।
गरीबदास जी देते हैं -
पग ऊपरि जल डालकर, हो गये खड़े कबीर। गरीबदास पंडा जरया, तहां परया योह नीर।।
जगन्नाथ जगदीश का, जरत बुझाया पंड। गरीबदास हर हर करत, मिट्या कलप सब दंड।।

💥"गोरखनाथ से गोष्ठी"
एक बार कबीर परमेश्वर जी और गोरखनाथ जी की गोष्ठी हुई। गोरखनाथ जी गंगा नदी की ओर चल पड़ा। उसमें जा कर छलांग लगाते हुए कबीर जी से कहा कि मुझे ढूंढ दो मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। गोरखनाथ मछली बन कर गए। कबीर साहेब ने उसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर सबके सामने गोरखनाथ बना दिया। तब गोरखनाथ कबीर जी के शिष्य बने।

💥"मृत गऊ को जीवित करना"
सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए।
तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी
तथा कहा -
गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह।
गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।
गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।

💥"सेउ की कटी हुई गर्दन को जोड़ना"
परमात्मा कबीर ने अपने भक्त की कटी हुई गर्दन वापिस जोड़ दी थी।
आओ सेउ जीम लो,यह प्रसाद प्रेम।
सिर कटते हैं चोरों के,साधों के नित्य क्षेम।।
ऐसी-2 बहुत लीलाएँ साहेब कबीर (कविरग्नि) ने की हैं जिनसे यह स्वसिद्ध है कि ये ही पूर्ण परमात्मा हैं। सामवेद संख्या नं. 822 तथा ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 2 में कहा है कि कविर्देव अपने विधिवत् साधक साथी की आयु बढ़ा देता है।

💥"काशी का अद्भुत भंडारा"
शेखतकी मुस्लिम पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी जगह झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी तीन दिन का भंडारा करेंगे, सभी आना। भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने तीन दिन का मोहन भंडारा कराया और लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हुए।

💥"मृत लड़की को जीवित करना"
शेखतकी ने कबीर साहेब को कहा कि अगर आप अल्लाह हो तो मेरी इस मृत लड़की को जीवित कर दो तब कबीर साहेब ने शेखतकी की मृत लड़की को जीवित कर किया था और उस लड़की का नाम कमाली रख दिया था।
💥नामदेव जी की छान डालना
जब जर्जर हुई झोपड़ी की छत को सही करने में लिए माता ने नामदेव को घास फूस लाने भेजा, तो रास्ते में सत्संग सुनने की वजह से और कुल्हाड़ी लगने से जब नामदेव घास फूस की व्यवस्था नहीं कर पाया और खाली हाथ घर लौटा तो नामदेव के रूप में कबीर जी झोपड़ी की छत डाल गए।

💥‘‘शिशु कबीर परमेश्वर का नामांकन"
जब कबीर साहेब का नाम रखने के लिए कुरान शरीफ पुस्तक को काज़ी ने खोला। प्रथम नाम ‘‘कबीरन्’’ लिखा था। काजियों ने सोचा इस छोटे जाति वाले का कबीर नाम रखना शोभा नहीं देगा। पुनः कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए।
कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।

💥"शिशु कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना’’

जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।

💥‘‘शिशु कबीर की सुन्नत करने का असफल प्रयत्न’’
शिशु रूपधारी कबीर देव की सुन्नत करने के लिए जब नाई कैंची लेकर गया तो परमेश्वर ने अपने लिंग के साथ एक लिंग और बना लिया। फिर उस सुन्नत करने को तैयार व्यक्ति की आँखों के सामने तीन लिंग और बढ़ते दिखाए कुल पाँच लिंग एक बालक के देखकर वह सुन्नत करने वाला आश्चर्य में पड़ गया। शिशु को बोलते सुनकर तथा पाँच लिंग बालक के देख कर नाई ने अन्य उपस्थित व्यक्तियों को बुलाकर वह अद्धभुत दृश्य दिखाया। सर्व उपस्थित जन समूह यह देखकर अचम्भित हो गया।

💥‘‘कबीर जी द्वारा स्वामी रामानन्द के मन की बात बताना’’
स्वामी रामानंद जी विष्णु जी की काल्पनिक मूर्ति बनाकर मानसिक पूजा करते थे। एक समय ठाकुर की मूर्ति पर माला डालनी भूल गए। तब कबीर परमात्मा जो कि 5 वर्ष के बालक की लीला कर रहे थे बोले कि माला की गांठ खोल कर गले में डाल दो स्वामी जी, पूजा खंडित नहीं होगी। तब रामानंद जी जो पर्दे के भीतर मन में पूजा कर रहे थे, कबीर परमात्मा को सबके सामने गले लगा लिया।
मन की पूजा तुम लखी मुकुट माल परवेश।
गरीबदास गति कौ लखै, कौन वरण क्या भेष।।

💥‘‘महर्षि सर्वानन्द की माँ शारदा का रोग ठीक करना"
एक सर्वानन्द नाम के महर्षि थे। उसकी आदरणीय माता श्रीमती शारदा देवी पाप कर्म फल से पीडि़त थी। उसने कबीर परमात्मा से उपदेश प्राप्त किया तथा उसी दिन कष्ट मुक्त हो गई।
क्योंकि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है।

💥गोरखनाथ के साथ चमत्कार
एक बार गोरखनाथ जी जब कबीर परमेश्वर जी के साथ ज्ञान गोष्ठी कर रहे थे तो गोरखनाथ जी कबीर जी के सामने 5-6 फुट का त्रिशूल जमीन में गाड़कर उस पर बैठ गये और कहा कि यदि वार्ता करनी है तो मेरे साथ आकर बैठो।
कबीर जी ने एक धागे की रील आसमान में उछाली और 150 फुट की ऊंचाई पर धागे के अंतिम सिरे पर जाकर बैठ गए। गोरखनाथ जी देखते रह गए।

💥मुर्दे को जीवित करना
ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।
उसी विधान अनुसार कबीर परमेश्वर ने कमाल, कमाली नाम के मुर्दों को जीवित किया था।



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मानवता की कसौटी { मैं_उस_दोर_का_बेटा_हूं }

#मैं_उस_दोर_का_बेटा_हूं #जीवो_के_प्रति_दया_मेरे_भारत_की_संस्कृति हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होत...